यथा यथा ही पुरुष: कल्याणे कुरुते मन: । तथा तथाsस्य सर्वार्था: सिद्धयंते नात्र संशय: ।। – विदुर नीति
अर्थ : जैसे-जैसे पुरुष मनको शुभ कार्योंमें लगाता है, वैसे-वैसे उसके सभी अर्थ, पूर्ण हो जाती हैं, इसमें अंशमात्र भी संदेह नहीं है।
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