
कुछ व्यक्ति मुझसे कहते हैं कि आप पाश्चात्य संस्कृतिकी विरोधक क्यों है ? पाश्चात्य संस्कृतिकी आहार, आचरण, वस्त्र, अलंकार, विचारधारा, सभी तमोगुणी होते हैं और सबसे हास्यस्पद तथ्य यह है कि उनके विषयमें उनके ही वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता बताते हैं है कि किस प्रकारसे उनके तमोगुणी विज्ञान एवं संस्कृतिके प्रत्येक वस्तु एवं विचार मानवके लिए घातक है ! लीजिये एक और वृत छपा है कि जींस एवं अन्य शरीरसे चिपके निचले हिस्सेके वस्त्र हमारे लिए अहितकारी कैसे है , जिसका विपरीत प्रभाव हमारे स्थूल शरीरपर पडता हो उसका हमारे सूक्ष्म देह अर्थात मन, बुद्धि इत्यादिपर कितना पडता होगा स्वयं सोचें , विशेषकर पाश्चात्य संस्कृतिमें रंगे हिंदुओंने ऐसे लेखोंको अवश्य पढ़ना चाहिए ! हमारी वैदिक संस्कृतिमें वस्त्रका भी एक विशेष सत्त्व गुण आधारित शास्त्र है जहां स्पष्ट रूपसे बताया गया है कि धोती कुर्ता , कुर्ता पायजामा, साडी सात्विक वस्त्र होते हैं और इसके धारणसे देवत्त्वको स्पष्ट रूपसे आकृष्ट कर सकते हैं ! -तनुजा ठाकुर
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