सरस्वती वन्दना


सुरासुरसेवितपादपङ्कजा
करे विराजत्कमनीयपुस्तका ।
विरिञ्चिपत्नी कमलासनस्थिता
सरस्वती नृत्यतु वाचि मे सदा ॥
अर्थ
: उन मां सरस्वतीको नमन है जिनके चरणकमलकी सेवा देवता और असुर दोनों ही करते हैं, जिनके हस्तमें एक सुन्दर ग्रन्थ है , जो ब्रह्माकी संगिनी है और पद्मपर विराजमान हैं । हे मां, आप मेरी वाणी पर सदैव नृत्य करें (अर्थात् मेरी वाणीको ओजस्वी बनाएं ) ।



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