श्रीगुरु उवाच


येन केन प्रकारेण, अर्थात कुछ भी कर चुनाव जीतना इतना ही स्वार्थी राजनीतिज्ञोंका ध्येय होता है, अतः वे आदर्श राज्यकी स्थापना नहीं कर सकते हैं। इसके विपरीत हिन्दू राष्ट्रकी अर्थात आदर्श राष्ट्रकी स्थापना करना , यह धर्माभिमानका ध्येय होता है; इसलिए वे ही  हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना कर सकते हैं ।

-परात्पर गुरु डॉ . जयंत आठवले (१६.५.२०१४)



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