श्रीगुरु उवाच


साधनासे शाश्वत आनंदकी प्राप्ति संभव !

पति-पत्नी एक दूसरेसे शारीरिक दृष्टिसे एकरूप होकर अल्पकालके लिये सुखकी अनुभूति लेते हैं किन्तु भक्त भगवानसे सदासर्वदा एकरूप होकर नित्य आनंद अनुभव करते हैं | – परात्परगुरु डॉ. जयंत आठवले (१२.७.२०१२)



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