पृथ्वीपर पति-पत्नीका सम्बन्ध, यह सबसे निकटतम सम्बन्ध है | पतिसे जुडने हेतु, पतिने, पत्नीके त्यागका स्मरण रखना चाहिए | विवाह्के पश्चात् पत्नी अपना नाम, अपने माता-पिता, अपने सगे-सम्बन्धियोंका त्याग करती है | पतिने उसे प्रेमका भेंट देकर उसकी नूतन यात्राको अच्छेसे आरम्भ करना चाहिए | पतिके नम्र होनेसे विवाहके पश्चात् भी उसे आदर प्राप्त होता है | विवाहके पश्चात् उसने ससुराल पक्षके व्यक्तियोंका मान रखना चाहिए, उसी प्रकार उनकी वृद्धावस्थामें उनसे किसी प्रकारकी अपेक्षा न रखते हुए पतिने उनका ध्यान रखना चाहिए | – पूज्य वसन्त आठवले
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