श्रीगुरु उवाच


भारतीय लोकतंत्रका लज्जास्पद स्वरुप !

पूparliamentर्वमें चुनावमें दो अच्छे प्रत्याशियोंमें (उम्मीद्वारोंमें) अधिक अच्छे प्रत्याशीको (उम्मीद्वारको) मतदाता अपना मत देते थे | अब दो बुरेमें कम बुरा कौन या जो अधिक धन दे, उसे चुनते हैं । – परम पूज्य डॉ. जयंत आठवले (७.१२.२०१३)

 



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