१. जिसने धर्मशास्त्रोंका गहन अध्ययन किया हो,
२.जिसने आत्म साक्षात्कार के लिए अखंड प्रयत्न कर उन ग्रन्थों की मुद्दे को आत्मसात करने का प्रयास किया हो और उस प्रयास में अखंडता बनाए हुए हो,
३. जो आत्मज्ञानी या आत्मज्ञान की प्रक्रिया में पूर्ण समय लिप्त हो,
४. जो कोई पूर्णत्व प्राप्त संत की शरण में रहकर अध्यात्म के गूढ रहस्यों को सीख आत्मसात किया हो,
५. जिसकी बुद्धि तीक्ष्ण हो और धर्मशास्त्र के गूढ रहस्य को समझने में सक्षम हो,
६. जिसे सूक्ष्म जगतका ज्ञान हो,
७. जो अपने अहमका प्रदर्शन करने हेतु नहीं अपितु ज्ञानप्राप्ति की इच्छा से कुछ लिखता या पूछता हो !-तनुजा ठाकुर
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