
लोकतंत्रके कारण देश तथा देशके लोगोंका आज तक कोई हित नहीं हुआ, यह पिछले ६७ वर्षोंके इतिहाससे स्पष्ट है । सत्ता आज है, कल नहीं होगी; परन्तु मानवी जीवनका सर्वांगीण उत्कर्ष साधनेवाला धर्म बना रहे; इसलिए सत्ताप्राप्तिके अल्पगामी हितोंके स्थानपर दीर्घगामी हित ध्यानमें रखते हुए धर्महित साधनेवाले निर्णय लें ! – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले(२७.९.२०१४)