गृहस्थानां परो धर्मों नान्योsत्यतिथिपूजनात् ।
अतिथेर्न च दोषोsस्ति तस्यातिक्रमणेन च ।।
गृहस्थोंके लिए अतिथि-सत्कारसे बढकर दूसरा कोई महान धर्म नहीं है । अतिथिसे महान कोई देवता नहीं है, अतिथिके उल्लंघनसे बडा भारी पाप होता है ।
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