शब्द योग्य प्रकारसे न लिखनेपर होनेवाला भाषाका विनोद
एक लेखका शीर्षक था,`Saints and Sad Gurus'(संत तथा दुःखी गुरु ) शीर्षकसे अर्थबोध नहीं हुआ; तो पढकर देखा, तब समझमें आया कि वह शीर्षककी चूक थी, `Saints And Sadgurus’ (संत तथा सद्गुरु) यह होना चाहिए था । इस घटनासे ज्ञात हुआ कि कोई भी लेख प्रकाशित करनेसे पूर्व उसके व्याकरणको ३-४ बार देख लेना कितना महत्त्वपूर्ण है ।-परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले (२३.११.२०१४)