आचार्यपुत्र: शुश्रूषु: ज्ञानदो धार्मिकः शुचि: ।
आप्त:शक्तोऽर्थद: साधु: स्वाऽध्याप्योदश धर्मतः ।। – मनुस्मृति (२:११२)
अर्थ : गुरुके अनुसार दस श्रेणीके व्यक्ति धर्मका ज्ञान देने योग्य होते हैं – १. आचार्यपुत्र, २. सेवा करनेवाला अर्थात् पुराना सेवक, ३. ज्ञान देनेवाला अध्यापक, ४. आचारवान तथा धर्मात्मा व्यक्ति, ५. पवित्र आचरण करनेवाला ६. सत्य बोलनेवाला ७. समर्थ पुरुष ८. धन या आजीविका देनेवाला ९. परोपकार करनेवाला १०. भलाई चाहनेवाला स्वजातीय