कहां अनेक पत्नियोंकी (बहुविवाहकी) अनुमति देनेवाले अन्य धर्म तो कहां ब्रह्मचर्य सिखानेवाला हिन्दू धर्म !
-परात्पर गुरु डॉ . जयंत आठवले (३०.३.२०१४)
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