पितृ दोषके लक्षण एवं उसके निवारणार्थ उपाय


आज सम्पूर्ण मानव जाति धर्माचरणके अभावके कारण, माध्यमसे तीव्र स्तरके पितृदोषके कष्टसे प्रभावित है | फलस्वरूप आज अनेक लोगोंके घरोंमें अतृप्त पूर्वजोंके कारण अनेक प्रकारके कष्ट देखे गए हैं जैसे विवाह न होना, निःसंतान होना, गर्भपात हो जाना, पति-पत्नीमें अनबन रहना, संबंध विच्छेद (तलाक) हो जाना, घरके सदस्योंका व्यसनी होना, घरके मुखिया या बडे संतानका शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूपसे सदैव कष्टमें रहना, कुलमें किसी व्याधिका वंशानुगत हो जाना, अर्थोपार्जनमें सदैव अडचनें आना इत्यादि जैसे कष्ट, पितृदोषके कारण हो सकते हैं |

ऐसेमें निम्नलिखित उपाय करें :
१. घरमें मृत पितरोंके चित्र न लगाएं |
२. श्रद्धापूर्वक मासिक एवं वार्षिक श्राद्ध करें |
३. प्रतिदिन ‘श्री गुरुदेव दत्त’ का चारसे छह घंटे जप करें |
४. दत्तात्रेय देवताकी नियमित पूजा करें |
५. कष्ट तीव्र हो तो किसी दत्तक्षेत्रमें जाकर वहाँ थोड़े दिन रहकर दत्त उपासना करना |
६. धर्मप्रसारमें यथाशक्ति तन, मन, धन, बुद्धि एवं कौशल्य अर्पण कर योगदान दें |
७. किसी संतकी सगुण सेवा करें अथवा उनके कार्यमें यथाशक्ति सहभागी हों |
८. पिंडदान या त्रिपिंडी श्राद्ध करें |
९. अधिकसे अधिक लोगोंको दत्तात्रेयका जप एवं पितृ-दोष निवारण हेतु सारे मुद्दे बताएं |
१०. घरमें काले रंगके वस्त्रका प्रयोग, यथासंभव न करें, सनातन धर्ममें काले रंगके वस्त्रको शनि-दोष निवारण हेतु, या मकर संक्रांति के दिन पहननेके अलावा उस वस्त्रका प्रयोग साधारण व्यक्तिके लिए निषेध किया गया है |
११. पितृपक्षमें ब्राह्मण भोजन कराएं |
१२. पितृपक्षमें प्रतिदिन ७२ माला ‘श्री गुरुदेव दत्त’जप करें
१३. पितृपक्षमें घरके पुरुषने पितरोंको प्रतिदिन जल-तिल तर्पणकर, श्राद्ध करना चाहिए |
दत्तात्रेयके नामजपद्वारा पूर्वजोके कष्टोंसे रक्षण कैसे होता है ?
कलियुगमें अधिकांश लोग साधना नहीं करते, अत: वे मायामें फंसे रहते हैं । इसलिए मृत्युके उपरांत ऐसे लोगोंकी लिंगदेह अतृप्त रहती है । ऐसी अतृप्त लिंगदेह मर्त्यलोक(मृत्युलोकमें) फंस जाती है । (मृत्युलोक, भूलोक व भुवलोकके बीचमें है ।) मृत्युलोकमें फंसे पूर्वजोंको दत्तात्रेयके नामजपसे गति मिलती है। वे अपने कर्मानुसार आगेके लोककी ओर अग्रसर होते हैं । अत: स्वाभाविक ही उनके संभावित कष्ट कम हो जाते हैं |

दत्तात्रेयके नामजपसे निर्मितशक्ति द्वारा नामजप करने वालेके आसपास सुरक्षाकवचका निर्माण होता है। इसे सुनने हेतु www.vedicupasanapeeth.org के होमपेजपर जाएं | – (पू.) तनुजा ठाकुर (संस्थापिका, वैदिक उपासना पीठ)



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