अजन्मानो लोकाः किमवयववन्तोऽपि जगतां ।
अधिष्ठातारं किं भवविधिरनादृत्य भवति ।।
अनीशो वा कुर्याद् भुवनजनने कः परिकरो ।
यतो मन्दास्त्वां प्रत्यमरवर संशेरत इमे ।।
अर्थ : हे प्रभु, आपके बिना ये सब लोक (सप्त लोक – भू: भुव: स्व: मह: जन: तप: सत्य) का निर्माण क्या सम्भव है ? इस जगतका कोई रचयिता न हो, ऐसा क्या सम्भव है ? आपके अतिरिक्त इस सृष्टिका निर्माण भला कौन कर सकता है ? आपके अस्तित्वके सम्बन्धमें केवल मूर्ख लोगोंको ही शंका हो सकती है ।