बचन परम हित सुनत कठोरे सुनहिं जे कहहिं ते नर प्रभु थोरे


यह याद रखें जो आपका खरा हितैषी होगा वो झूठमूठ आपकी प्रशंसा नही करेगा हो सकता है वो इतना कठोर बोल दे कि सहन करना कठिन हो जाये; परन्तु वे खरे हितैषी होते हैं ।
रामचरितमानसमें लिखा है कि –
बचन परम हित सुनत कठोरे
सुनहिं जे कहहिं ते नर प्रभु थोरे
अर्थात् सम्पूर्ण धरतीपर सुननेमेँ कठोर परन्तु परिणाममें परम हितकारी वचन जो सुनते हैं और कहते हैं ऐसे मनुष्य थोडे हैं ।



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