धर्मांधोंका तुष्टिकरण करनेवाले राजकीय पक्षोंने आतंकवादियोंको चुनाव हेतु प्रत्याशी घोषित किया, उनके स्मृतिदिनको ‘राष्ट्रीय दिन’ कहकर मनाया अथवा उन्हें ‘भारतरत्न’से पुरस्कृत किया तो आश्चर्य नहीं होगा । (३०.३.२०१४)
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