निरंतर जलनेवाला दीपक अर्थात् आत्मज्योत (ब्रह्म) । यह स्थिर होता है


diya 111प.पू. भक्तराज महाराज : निरंतर जलनेवाले दीपकका ओर किसीका ध्यान नहीं जाता । झिलमिलाता दीपक सभीका ध्यान आकर्षित करता है ।
भावार्थ : निरंतर जलनेवाला दीपक अर्थात् आत्मज्योत (ब्रह्म) । यह स्थिर होता है । झिलमिलाता दीपक अर्थात् माया । इसकी ओर सभीका ध्यान तुरंत आकर्षित होता है ।



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