पितृदोष निवारण हेतु सरल आध्यात्मिक उपाय
पितृदोष निवारण हेतु निम्नलिखित उपाय करें:
- दत्तात्रेय देवताके चित्र या मूर्तिकी प्रतिदिन पूजा करें |
- किसी ब्राह्मणको प्रत्येक मास अपने घरके मुखियाकी मृत्यु तिथिपर और तिथिकी जानकारी न होनेपर, अमावस्याके दिन भोजन करवाएं, यह संभव न हो, तो ब्राह्मणको भोजन हेतु कुछ पैसे प्रत्येक महीने उस तिथिपर दें | (इस तिथिपर दरिद्रको भोजन करानेसे पितृ दोष निवारणमें कोई सहायता नहीं मिलती |)
- छह घंटे नियमित “श्री गुरुदेव दत्त” का जप करें |
- दत्तात्रेय देवतासे भावपूर्ण प्रार्थना कुछ इस प्रकार करें —
“हे दत्तात्रेय देवता, जो भी पितर मेरे परिवारके परूष वर्गके जीवीकोपार्जनके मार्गमें अडचण निर्माणकर रहे हैं, उनसे आप हमारा रक्षण करें, हमारे परिवारके सभी सदस्योंके चारों ओर अभेद्य सुरक्षा कवच निर्माण होने दें | अपनी कृपादृष्टि हमपर बनाए रखें, हम आपके शरणागत हैं” |
यह प्रार्थना नामजपके साथ-साथ आप दिनमें जितनी अधिक बार कर सकते हैं, करें |
- घरमें पितरोंके चित्र दृष्टिके सामनेसे, या पूजा घरसे हटा दें | उसे या तो विसर्जित करें, या अलमारीमें एक श्वेत वस्त्रमें बांधकर रख दें, श्राद्धके दिन यदि निकालना चाहें, तो निकाल सकते हैं |
- अधिकसे अधिक लोगोंको दत्तात्रेयका जप एवं पितृ-दोष निवारण हेतु सारे मुद्दे बताएं |
- घरमें काले रंगके वस्त्रका प्रयोग, यथासंभव न करें, सनातन धर्ममें काले रंगके वस्त्रको शनि-दोष निवारण हेतु, या मकर संक्रांति के दिन पहननेके अलावा उस वस्त्रका प्रयोग साधारण व्यक्तिके लिए निषेध किया गया है |
- पितृपक्षमें ब्राह्मण भोजन कराएं |
- पितृपक्षमें प्रतिदिन ७२ माला ‘श्री गुरुदेव दत्त’जप करें
- पितृपक्षमें घरके पुरुषने पितरोंको प्रतिदिन जल-तिल तर्पणकर, श्राद्ध करना चाहिए |
- संत कार्य या धर्मकार्यमें यथाशक्ति तन-मन-धनसे योगदान करें |-परात्पर गुरु – तनुजा ठाकुर
Leave a Reply