
पाश्चात्यीकरणके रंगमें रंगे कुछ आधुनिक भारतीयोंका मानना है कि हाथसे भोजन ग्रहण करना “table manners” के विरुद्ध है !
आइए जाने हाथसे भोजन ग्रहण क्यों करना चाहिए ?
हमारे शरीरसे सर्वाधिक मात्रामें शक्तिका प्रवाह हमारे पैरोंकी अंगुलियोंसे होता है, उसके पश्चात्त हाथोंकी अंगुलियोंके पोरोंसे | हाथसे भोजन ग्रहण करते समय, अंगुलियोंसे निकलने वाली शक्ति भोजनमें आवेशित हो जाती है और यह शक्ति भोजनको सुपाच्य बनानेमें सहायता करती है ।
चम्मचसे जब तक हम भोजन लेकर उसे मुखमें डालते हैं तब तक वह शक्ति चम्मचसे प्रवाहित हो भोजनमें नहीं जा पाती ! अब आप बताएं कौन सा संस्कार अधिक उपयोगी, सभ्य एवं योग्य है ? ध्यान रहे वैदिक संस्कृतिकीप्रत्येक कृति उच्च कोटिके शास्त्र अध्यात्मशस्त्रपर आधारित है और सभ्यताका भी प्रतीक है ! -तनुजा ठाकुर
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