वेद और धर्मग्रंथ सनातन धर्मके आधार हैं | परमेश्वरने श्रृष्टिका संगोपन करने हेतु उसकी उत्त्पत्तिके समय ही वेदोंकी निर्मिती करी | मात्र ईश्वरका नाम वेदोंसे श्रेष्ट है क्योंकि वेदोंकी निर्मिति भी ओमकार अर्थात इश्वरके नामसे हुई है | अतः संत भक्तराज महाराजने कहा है कि नामजप वेद उपनिषद् जैसे धर्मग्रंथोंके परायणसे अधिक श्रेष्ठ है | -परात्पर गुरु डॉ जयंत आठवले
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