
हिन्दुओ ! वार्तालाप करते समय शुद्ध हिन्दी शब्दोंका प्रयोग कर, अपनी वाणीको सात्त्विक बनाएं एवं अन्योंको भी ऐसा करने हेतु प्रेरित करें ! वाणीके सात्त्विक होनेसे उसमें चैतन्यके (ईश्वरीय शक्तिके) प्रवाहमें वृद्धि होती है जिससे सुननेवालेपर भी अच्छा प्रभाव पडता है | आपकी सहायता हेतु हम आजसे प्रतिदिनके जीवनमें जो भी तामसिक शब्द हमारी भाषामें स्थान बनाने लगे हैं, उसे निष्काषित कर शुद्ध संस्कृतनिष्ठ शब्दोंके प्रयोग आरम्भ कर , भाषाशुद्धिके इस अभियानमें अपना योगदान देकर, धर्मकर्तव्यका निर्वाह करें, ऐसी आपसे विनती है | – वैदिक उपासना पीठ
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