‘अनारकली पद्धति’की सलवार-कुर्ती है तामसिक


हमारी वैदिक संस्कृति सत्त्वगुण आधारित है; किन्तु धर्मशिक्षणके अभावमें आज हिन्दुओंको सत्त्व, रज और तमका सिद्धान्त ज्ञात न होनेके कारण वे अपनी दिनचर्यामें भाषा, आचार, भोजन, सब कुछ तमोगुणी करने लगे हैं । जैसे आजकी स्त्रियां ‘अनारकली पद्धति’की सलवार-कुर्ती पहनती हैं । क्या उन्हें ज्ञात नहीं कि ‘अनारकली’ कौन थी एवं उसकेद्वारा धारण किए हुए वस्त्र तमोगुणी होंगे ? क्या पूर्वके कालमें कभी हिन्दू स्त्रियोंने मुसलमानी वस्त्र धारण किए थे ? किन्तु साधनाका आधार नहीं होनेके कारण आज अधिकांश स्त्रियोंको सूक्ष्म सम्बन्धी ज्ञान नहीं है; अतः जो भी कुछ आज समाजमें प्रचलित होता है (फैशनमें रहता है) उसे वे धारण कर लेती हैं; परिणामस्वरूप उनके शरीरमें काली शक्ति एकत्रित होती रहती हैं और इस कारण वे शारीरिक रूपसे तो कष्टमें रहती ही हैं, मानसिक रूपसे भी अत्यधिक अशान्त रहती हैं । वैसे भी स्त्रीका शरीर अनिष्ट शक्तियोंके आक्रमण हेतु पोषक होता है, ऐसेमें यदि वे सात्त्विक नहीं रहती हैं तो उन्हें अनिष्ट शक्तियोंका कष्ट सहज ही हो जाता है । – तनुजा ठाकुर



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