विदेशमें रहनेवाले उच्च स्तरके हिन्दुओंको इतना अधिक कष्ट है कि वे ५०% आध्यात्मिक स्तर होनेपर भी नियमित नामजप नहीं कर पाते हैं । यह मैंने विदेश धर्मयात्राके मध्य स्पष्ट रूपसे पाया । कुछ युवा साधक जिनका आध्यात्मिक स्तर ५०% के लगभग था, वे मुझसे दुःखी होकर कहते थे कि जब तक आपका सान्निध्य मिलता है नामजप रुकता ही नहीं है एवं आपके जानेके उपरान्त नामजप पूर्णतः रुक जाता है या नामजप करने हेतु बैठना चाहिए, यह ज्ञात होते हुए भी हम बैठ नहीं पाते हैं, इसका हमें दुःख भी होता है; किन्तु हम कुछ कर नहीं पाते हैं । यह सब वहांके तमोगुणी वातावरण, आहार-विहार, दिनचर्या, वेशभूषा इत्यादिके कारण होता है जिसके फलस्वरूप सात्त्विक जीवात्माओंपर सूक्ष्म शक्तियोंका प्रभाव अधिक होनेसे उनकी साधना या तो नहीं हो पाती है या उसमें नियमितता नहीं रह पाती है । अतः हिन्दुओ ! क्षणिक सुख हेतु विदेश जाकर अपनी और अपनी आनेवाली पीढियोंकी आध्यात्मिक हानि न करें ! – तनुजा ठाकुर
Leave a Reply