कृष्णको तुलसी प्रिय इसका यह है भावार्थ


कृष्णको तुलसी प्रिय है, ऐसे वाक्य भक्तियोगमें होते हैं । कुछ व्यक्तियोंको लगता है, भगवानको प्रिय-अप्रिय कैसा ? प्रत्यक्षमें ऐसे वाक्यका अर्थ होता है, तुलसीमें श्रीकृष्णतत्त्व अधिक प्रमाणमें होता है  – परात्पर गुरु डॉ . जयंत आठवले

 



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