वर्तमान प्रजातन्त्रका यदि विद्रूप स्वरुप देखना हो तो चुनावके समय अवसरवादी सत्तालोलुप नेताओंके कुकृत्योंका अभ्यास करना चाहिए । राष्ट्रहित एवं प्रजाके हितको छोड, वे स्वहित साध्य करने हेतु किसी भी सीमातक गिर सकते हैं । इस स्थितिको परिवर्तित करने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करना अनिवार्य हो गया है । – तनुजा ठाकुर
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