यदि आप किसी मिस्त्रीको कार्य हेतु बुलाएं और वह बार-बार अपने उपकरण (औजार) लेकर न आए तो आप उसे क्या कहेंगे ? अनके जिज्ञासु या साधक भी जब आश्रममें आते हैं तो वे न ही जपमाला लेकर आते हैं, न ही अपने साथ स्वभावदोषकी ‘डायरी’ या अन्य कोई अभ्यास-पुस्तिका और लेखनी (कलम) लेकर आते हैं ? यदि आपको अध्यात्म और साधना सीखनी है तो ये आपके माध्यम हैं; अतः इन्हें अपने साथ सदैव रखें ! अन्यथा आपके लिए साधना सीखना कठिन होगा !– तनुजा ठाकुर
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