१. अधिकांश जन वृद्धावस्थाके कालमें शारीरिक विकार तथा मानसिक अस्वस्थतासे ग्रसित होकर जीवनसे उकता जाते हैं और वे मृत्युकी बाट जोहते हैं ।
२. साधनामें प्रगति करनेपर कुछ जनोंको मृत्यु उपरान्तका नूतन जगत देखें, ऐसी इच्छा होती है; जिज्ञासा होती है कि वह जगत कैसा होगा; इसलिए भी वे मृत्युकी बाट जोहते हैं । – परात्पर गुरु डॉ . जयंत आठवले
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