जो समय बीत चुका है उसके विषयमें विचार करना व्यर्थ है एवं जो भविष्यमें घटित होनेवाला है उसके सम्बन्धमें भी सोचना बहुमूल्य समयको व्यर्थ करना है । मन अनावश्यक तथ्योंमें रममाण न हो इस हेतु मनमें विचारोंके आवेगको नियन्त्रित करने हेतु नामजप करना चाहिए । सूक्ष्म विचारोंको नियन्त्रित करने हेतु कोई सूक्ष्म माध्यम ही चाहिए और इस हेतु नामजप एक अद्भुत एवं अमोघ सूक्ष्म अस्त्र है । यथार्थमें वर्तमानकालमें रहने हेतु मनको नामजपममें लगाए रखना सर्वश्रेष्ठ उपाय है । एक शास्त्रवचन अनुसार
गते शोको न कर्तव्यो भविष्यं नैव चिंतयेत् ।
वर्तमानेन कालेन वर्तयंति विचक्षणाः ॥
अर्थात् भूतकालके विषयमें सोचकर दुःखी होते नहीं और भविष्यकी चिन्ता करते नहीं, बुद्धिमान व्यक्ति वर्तमानमें रहते हैं । बुद्धिका उपयोग कर, साधनारत होकर जो वर्तमानमें रहते हैं, वे ही आनन्दमें रहते हैं और वे ही बुद्धिमान कहलानेके खरे अधिकारी हैं । – पूज्या तनुजा ठाकुर
Leave a Reply