गोवंशके स्थानपर बाघोंको संरक्षण देना कहांकी है बुद्धिमानी ?


वृत्त प्रकाशित हुआ है कि देशमें बाघोंकी संख्यामें ६% की वृद्धि हुई है । किंचित सोचें ! यदि उनकी संख्यामें अधिक वृद्धि हो गई तो क्या होगा ? स्वतन्त्रता पश्चात् इस देशमें जितना संरक्षण बाघोंको दिया गया है, उतना ही संरक्षण यदि देसी गोवंशको दिया जाता तो आज इस देशकी अर्थव्यवस्था, समाजका स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि इत्यादि अनेक क्षेत्रोंको लाभ मिलता; किन्तु विवेकशून्य राज्यकर्ताओंको इस तथ्यका बोध नहीं होता; अपितु स्वतन्त्रता पश्चात् इस देशमें मूल देसी गोवंशकी संख्यामें अत्यधिक गिरावट आई है एवं यह तथ्य सभी हिन्दुत्ववादियोंके मनमें पीडा उत्पन्न करता है । – तनुजा ठाकुर



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