कुन्तीने भगवान श्रीकृष्णके माध्यमसे पाण्डवोंको सन्देश भेजते हुए कहा –
कालो वा कारणं राज्ञो राजा वा कालकारणम् ।
इति ते संशयो मा भूत् राजा कालस्य कारणं ।।
अर्थात राजाका कारण काल है, या कालका कारण राजा है, ऐसा सन्देह तुम्हारे मनमें नहीं उठना चाहिए; क्योंकि राजा ही कालका कारण होता है; अत: राजाके सात्त्विक होनेसे काल भी सतयुग हो जाता है । रामावतार त्रेतायुगमें हुआ और शास्त्र अनुसार त्रेतायुगमें धर्मका तीन चरण व्याप्त रहता है; किन्तु रामराज्यके उपरान्त धर्म, चार चरणोंमें व्याप्त हो गया, गोस्वामी तुलसीदासजी इस सन्दर्भमें रामचरितमानसमें लिखते हैं –
चारिउ चरन धर्म जग माहीं ।
पूरि रहा सपनेहुं अघ नाहीं ।। – रामचरितमानस (७.२१.३)
उसीप्रकार कलियुग वर्ष ५२२७ (विक्रम संवत २०२५) में हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाके पश्चात सात्त्विक, कर्तव्यपरायण, राष्ट्रनिष्ठ, धर्मनिष्ठ एवं प्रजासे पिता समान स्नेह करनेवाले राज्यकर्ता ही राज करेंगे एवं जिसमें धर्मके चारों चरण व्याप्त होंगे; फलस्वरूप सर्वत्र सुख, शान्ति एवं समृद्धि होगी । – तनुजा ठाकुर
किन्तु आज के समय और राजनीती को देखते हुए ऐसा संभव होता दिखाई नहीं दे रहा, आगे प्रभु कृपा