१. अबतक पाकिस्तान बांग्लादेश एवं कश्मीर स्थित हिन्दुओंपर होनेवाले अत्याचारोंके समाचार हमने पढे । अब बंगालवासी हिन्दुओंपर अत्याचारके समाचार आने लगे हैं । भविष्यमें भारतमें सर्वत्र हिन्दुओंपर अत्याचारके समाचार आएंगे । सभी राजकीयपक्ष आजतक इन घटनाओंको टालनेमें असमर्थ रहे हैं और आगे भी इन्हें टालनेमें असमर्थ रहेंगे । इससे बचने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करना अपरिहार्य हो गया है ।
२. मानवजातिके लिए एकमेव आधार है हिन्दू धर्म, उसके रक्षणार्थ हिन्दू राष्ट्रके अतिरिक्त कोई पर्याय नहीं । जाति, भाषा, सम्प्रदाय, संगठन इत्यादि कारणोंसे हिन्दू समाज अनेक घटकोंमें विभाजित हो गया है । मात्र हिन्दू धर्मरक्षण हेतु आवश्यक है हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना, इस एक ध्येयके लिए तो सभी हिन्दू एकत्रित हो ही सकते हैं; इस हेतु प्रयत्नोंकी पराकाष्ठा करना आवश्यक है, अन्यथा आगे जाकर “मानवजातिके लिए एकमेव आधार ‘हिन्दू धर्म’ था”, ऐसा इतिहास कहेगा ! कुछ भी करके, हमें यह टालना है ।
३. बांग्लादेशी घुसपैठियोंके कारण आगे चलकर भारतीय हिन्दुओंकी होनेवाली विकट स्थितिसे बचनेके लिए, हिन्दू राष्ट्रके अतिरिक्त कोई पर्याय नहीं !
घरमें आनेवाले चोरोंका कोई द्वार खुले रखकर स्वागत नहीं करता; परन्तु बंगालकी तृणमूल कांग्रेस तथा केन्द्रका कांग्रेस शासन बांग्लादेशी घुसपैठियोंका स्वागत कर रहा है । आगे चलकर यही चोर, घरवालोंको ‘यह मेरा घर है’ कहकर बाहर कर दें तो जो घरवालोंकी जो अवस्था होगी, वही अवस्था अब बांग्लादेशी घुसपैठियोंके कारण भारतमें हिन्दुओंकी होनेवाली है ! इससे बचनेके लिए हिन्दू राष्ट्रके अतिरिक्त कोई पर्याय नहीं ।
४. बलात्कारके समाचारोंसे तनावग्रस्त होती लडकियां तथा स्त्रियां !
आजकल प्रतिदिन बलात्कारकी वार्ताएं सुननेको मिलती हैं । इस कारण कुछ युवतियों एवं स्त्रियोंके मनमें “हमपर बलात्कार हो रहा है, हमारी हत्या हो रही है, इस प्रकारके विचार आते हैं ।” अथवा ऐसे स्वप्न आते हैं; फलस्वरूप उन्हें मानसिक कष्ट होता है । लडकी बाहर गई हो तो उसके वापस आनेतक लडकीके माता–पिता भी चिन्तित रहते हैं । सर्वपक्षीय राजनेताओंके कारण जनताकी यह स्थिति हुई है । इसपर उपाय एक है और वह है साधना तथा नैतिकता सिखानेवाले हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करना ! – परात्पर गुरु डॉ. जयन्त आठवले
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