सात्त्विक जीवन प्रणाली कैसे करें व्यतीत ? (भाग – १)


कुछ पाठकोंने व्हाट्सएपपर हमारे लेखोंको पढनेके पश्चात् पूछा है कि वे अपने जीवन प्रणालीको सात्त्विक कैसे बनाएं ? इस प्रश्नके समाधान हेतु यह लेख श्रृंखला आरम्भ कर रहे हैं  –
योग्य प्रकारसे धर्माचरण एवं साधनाको अंगीकृत करनेसे ही हम सात्त्विक बन सकते हैं, सात्त्विक रहनेसे हमारे जीवनमें सुख, शान्ति, समृद्धि एवं देवकृपा सब कुछ प्राप्त होता है, इसे हेतु योग्य साधनाके साथ कुछ छोटे-छोटे प्रयास अपनी दिनचर्यामें डालें, जो निम्नलिखित हैं –
अ. प्रातःकाल सूर्योदयसे पूर्व उठनेका अभ्यास करें । उठनेके पश्चात् हस्त-वन्दना, भूमि-वन्दना, देव-स्तुति, गुरु-स्तुति करनेके पश्चात् ही भूमिपर अपने चरण डालें । सूर्योदयके पश्चात् जितनी देरसे हम उठते हैं, हमारे मन एवं बुद्धिपर सम्पूर्ण दिवस उतना ही मोटा, सूक्ष्म अनिष्ट काला आवरण जो तमोगुणसे भारित होता है, वह निर्माण हो जाता है जिससे शरीर, मन एवं बुद्धि सभीमें अशुद्धियां निर्माण होती हैं जो रोग, शोक और क्लेशका कारण बनती हैं ।
आ. रात्रि ग्यारह बजेके पश्चात् न जागें, लेखन, पठन, साधना इत्यादि प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्तमें उठकर करें । रात्रिके ग्यारह बजेसे ढाई बजे तकका काल तमोगुणी होता है, इसकालमें अनिष्ट शक्तियां अधिक क्रियाशील रहती हैं, ऐसेमें जगे रहनेसे अनिष्ट शक्तियोंके कष्ट होनेकी सम्भावना अत्यधिक बढ जाती है फलस्वरूप व्यसन, अनिद्रा, पाचन शक्तिकी समस्याएं इत्यादि अनेक कष्ट निर्माण होने निर्माण लगते हैं  – तनुजा ठाकुर  (क्रमश:)



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