शास्त्र वचन


चिता चिंता समाप्रोक्ता बिंदुमात्रं विशेषता ।      सजीवं दहते चिंता निर्जीवं दहते चिता॥                    अर्थ : चिता और चिंता समान कही गयी हैं;  परन्तु चिंतामें प्रयुक्त बिन्दुकी एक विशेषता होती है,  चिता मृतको जलाता है और चिंता जीवितको।



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