शास्त्र वचन


रिक्तपाणीर्नपश्येत राजानं दैवतं गुरुम् ।
दैवज्ञं पुत्रकं मित्रं फलेन फलमादिशेत् ।।
अर्थ
: राजा, गुरु, विद्वान, अध्यात्मविद, बालक एवं मित्रके यहां रिक्त हाथ नहीं जाना चाहिए। फलकी अपेक्षा फलसे करें।



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