स्वतन्त्रताके सात दशक पश्चात् भी इस देशके ३८% विद्यालयमें नहीं है विद्युत् व्यवस्था !
देशके मात्र ६२.८१% विद्यालयोंमें ही बिजलीकी व्यवस्था है । शासनने (सरकारने) ३ अगस्तको राज्यसभामें यह जानकारी दी। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) राज्य मन्त्री उपेन्द्र कुशवाहाने एक प्रश्नके लिखित उत्तरमें बताया कि इस सूचीमें सबसे नीचे क्रमपर झारखण्ड है, जहांके मात्र १९% विद्यालयोंमें ही बिजली आती है ।
केन्द्रीय राज्य मन्त्रीने ‘यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफार्मेशन सिस्टम फार एजुकेशन’के माध्यमसे जुटाए आंकडोंके आधारपर कहा कि असमके २५, मेघालयके २८.५४, बिहारके ३७.७८, मध्य प्रदेशके २८.८०, मणिपुरके ३९.२७, ओडिशाके ३३.०३ और त्रिपुराके २९.७७ प्रतिशत विद्यालयोंमें ही बिजलीकी व्यवस्था है !
इन आंकडोंसे इस देशकी दु:स्थिति ज्ञात होती है | जिस देशके राज्यकर्ता अपनी अगली पीढीको शिक्षित करने हेतु विद्यालयोंमें बिजली जैसे आवश्यक मूलभूत सुविधा अभीतक सर्वत्र उपलब्ध नहीं करवा पाएं है, वे राष्ट्रका सर्वांगीण उत्कर्ष कैसे साध्य कर पाएंगे ? इस स्थितिको परिवर्तित करने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अपरिहार्य हो गया है । (४.८.२०१७)
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