निष्काम प्रार्थनासे होती है ईश्वरीय कृपाका सम्पादन प्रार्थना दो प्रकारकी होती है, सकाम एवं निष्काम प्रार्थना । सांसारिक वस्तुकी प्राप्ति हेतु की जानेवाली प्रार्थना सकाम होती है एवं ईश्वरीय कृपा या आध्यात्मिक प्रगति सम्पादन हेतु, राष्ट्र एवं धर्म रक्षण या धर्मप्रसारमें आनेवाली बाधाएं दूर करने हेतु तथा सूक्ष्म जगतकी अनिष्ट शक्तियोंके कारण होनेवाले व्यष्टि कष्टके निवारणार्थ की जानेवाली सर्व प्रार्थनाएं निष्काम होती हैं । जहां सकाम प्रार्थनासे हमारी स्वयंकी साधना व्यय हो जाती है, वहीं निष्काम प्रार्थनासे हमपर ईश्वरकी या गुरुकी कृपा सम्पादित होती है तथा भाव जागृति हेतु निष्काम प्रार्थनाका विशेष महत्त्व होता है । ईश्वरको व्यापक हित हेतु विचार करनेवाले व्यक्ति प्रिय होते हैं और इसलिए व्यापकता एक ईश्वरीय गुण होता है । ‘मैं और मेरा परिवार’, इस संकुचित मनोवृत्तिसे उठकर हम जितना व्यापक होकर ईश्वरसे ‘बहुजन हिताय बहुजन सुखाय’की भावनासे प्रार्थना करते हैं, हमारा भाव उतना ही शीघ्र जागृत होता है; अतः वर्तमान काल हेतु पूरक प्रार्थना करनेका प्रयास सभी साधकोंने करना चाहिए और हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना हेतु प्रार्थना करना, यह सर्वाधिक सामयिक एवं पूरक प्रार्थना है । – तनुजा ठाकुर (१३.१०.२०१७) (क्रमश:)
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