सत्सेवासे मनके विकारका नष्ट होना


अखण्ड नामस्मरण और सत्सेवासे हम अपने मनके विचारोंके आवेगको नियन्त्रित कर सकते हैं । सत्सेवा  सन्तकी या धर्मप्रसारकी सेवा अर्थात् किसी सन्तके कार्यमें सहभागी हों ! इससे ईश्वरीय कृपा या गुरुकृपाका संचार होता है और मनके विकार नष्ट होते हैं ।- तनुजा ठाकुर



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