प्रार्थना – भावजागृतिका एक महत्त्वपूर्ण घटक (भाग – ११)


एक भक्तका जीवन एक ईश्वरीय अनुष्ठान होता है । उसका प्रत्येक कर्म ईश्वरकी आराधना है । तो आइए, हमारा जीवन ऐसा कैसे बनें ?, इस हेतु हम अपने प्रत्येक कर्मको भावपूर्वक करनेका प्रयास करेंगे और इस सम्बन्धमें हम दिनचर्या सम्बन्धी, छोटे-छोटे, किन्तु महत्वपूर्ण तथ्योंको बुद्धिसे समझेंगे और उसके पश्चात उसे जीवनमें उतारेंगें । विश्वास करें, आप अपने जीवनके जिस पडावपर हैं, वहींसे आपको ईश्वरीय तत्त्वकी अनुभूति होने लगेगी और आपका जीवन आनन्द और शांतिसे ओत-प्रोत हो जाएगा ।
प्रातःकाल उठकर बिछावनपर की जानेवाली प्रार्थनासे अपने दिनचर्याका शुभारम्भ कुछ इसप्रकार करें –
“हे प्रभु ! आजका सम्पूर्ण दिवस, सभी कार्योंको (साधक सेवा बोल सकते हैं) करते हुए, मैं नामजप कर पाऊं, ऐसी आप कृपा करें । हे जगन्नाथ, मुझ निकृष्ट जीवका यह मायावी मन, जब-जब मुझे मायामें लिप्त करे, तब-तब मुझे आपके नामका पुनः स्मरण हो, ऐसा मुझसे प्रयास होने दें । मेरा यह जीवन राष्ट्र और धर्म हेतु पूरक हो एवं मुझसे सम्पूर्ण दिवस धर्मका यथासम्भव पालन हो सके, ऐसी आप कृपा करें ।  धर्मपालन हेतु आप ही हमें आवश्यक भक्ति, शक्ति और ज्ञान दें !’’



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