श्रीनगर. दक्षिण कश्मीर के शोपियां में सुरक्षाबलों के साथ रविवार को मुठभेड़ में ढेर हुए आतंकी मोहम्मद रफी भट ने आखिरी बार माता-पिता को फोनकर माफी मांगी थी। वह कश्मीर यूनिवर्सिटी में सोशियोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर था। रफी शुक्रवार दोपहर को ही यूनिवर्सिटी से अचानक लापता हुआ था। उसके पिता फय्याज अहमद भट के मुताबिक, मौत से पहले रफी ने कहा- ‘अगर मैंने आपका दिल दुखाया है तो माफ करना।’ पुलिस ने रफी के सरेंडर के लिए कोशिश की, परिवार को एनकाउंटर साइट पर लाया जा रहा था, पर रास्ते में उन्हें रफी के मारे जाने की खबर मिली।
रफी ने पिता से कहा- अल्लाह से मिलने जा रहा हूं
– जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक, रफी की फैमिली शोपियां जिले में अपने घर पर थी, जब रविवार सुबह उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। दरअसल, रफी ने ही माता-पिता से बात करने के लिए आखिरी बार फोन किया था।
– अहमद भट ने पुलिस को बताया कि उन्होंने बेटे से आखिरी बार हुई बातचीत में उसे मनाने की कोशिश की। लेकिन रफी ने कहा- ‘अगर मैंने आपको दुख पहुंचाया है तो मुझे माफ करना। यह मेरा आखिरी कॉल है, मैं अल्लाह से मिलने जा रहा हूं।’
आतंकी के सरेंडर के लिए परिवार की मदद ली गई
– दरअसल, शोपियां में एनकाउंटर के दौरान पुलिस इलाके के सभी कॉल ट्रेस कर रही थी। तभी रफी के अपने घर फोन करने का पता चला। फिर पुलिस टीम उसके परिवार को मुठभेड़ वाली जगह पर लाने के लिए उसके घर भेजी गई ताकि वे उसे सरेंडर के लिए मना सकें।
– पुलिस के साथ रफी के पिता, मां, पत्नी और बहन मौके पर रवाना हुईं। इसी बीच रास्ते में ही उन्हें रफी के मारे जाने की खबर मिली। इसके बाद आतंकी का परिवार घर लौट आया और दफन की तैयारियां करने लगा।
2 दिन पहले लापता हुआ प्रोफेसर से आतंकी बना रफी
– रफी भट शुक्रवार दोपहर 3.30 बजे यूनिवर्सिटी से लापता हो गया था। आशंका जताई जा रही थी कि वह हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया। पर पिता ने हमेशा इसे नकारा और कहा कि मेरा बेटा कभी हथियार नहीं उठा सकता है।
– अहमद भट ने बताया कि वे रफी पर कड़ी नजर रखते थे। 18 साल की उम्र में उसने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जाने की कोशिश की, पर पुलिस ने उसे पकड़कर परिवार के हवाले कर दिया। रफी का एक चचेरा भाई भी 1990 के दशक में आतंकी संगठन से जुड़ा था, बाद में उसका भी एनकाउंटर हो गया।
– कश्मीर के आईजी एसपी पाणि के मुताबिक, “जब हमें भट के आतंकियों के साथ होने का पता चला तो हमने गांदेरबल स्थित उसके परिवार से उसे समर्पण कराने को कहा। कई कोशिशों के बाद भी उसने समर्पण नहीं किया।”
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