धर्मधारा


प्राकृतिक आपदाओंकी तीव्रता प्रत्येक वर्ष बढती जा रही है, इस बार एक साथ अनेक राज्योंमें (१३ राज्योंमें) पञ्चतत्त्वोंका प्रकोप क्रियाशील है, अब भी हिन्दू यदि संतोंकी बातको मानकर साधनाको प्रधानता न दें तो उनकी रक्षा कौन करेगा ? यह प्रकोप प्रत्येक वर्ष और विकराल स्वरूप लेता जाएगा और २०२३ से पूर्व विनाशका एक बडा कारण बनेगा । आधुनिक विज्ञान मात्र इसकी आंशिक पूर्वसूचना ही दे सकेगा अर्थात रक्षण करनेमें असफल रहेगा !



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