प्रशासनिक अधिकारीका पदभार सम्भालनेसे पूर्व एक निर्धारित कालावधितक प्रशिक्षण दिया जाता है; किन्तु उनपर शासन करे, ऐसे राजनेता बनने हेतु किसी भी प्रशिक्षणकी आवश्यकता नहीं होती है ! कोई भी ‘ऐरे-गैरे नत्थू खैरे’को यहांकी मूढ प्रजा, राजनेता बना देती है। एक बार एक विद्वान व्यक्तिने मुझसे कहा था ‘do you know, in today’s so called democracy, the creamy layer of the society (the intellectuals) is ruled by a set of idiots’ ! “अर्थात क्या आप जानती हैंं? आजके तथाकथित लोकतंत्रमें समाजका जो सबसे बुद्धिमान वर्ग है उसे मूर्खोंकी टोली नचाती है। ” आजके लोकतंत्रको देखकर उन महोदयकी बातमें सत्यता प्रतीत होती है !
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