नई दिल्ली : सोमवार को भारी हिंसा के बीचपश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव की वोटिंग खत्म हो गई. यहां भारी हिंसा के बीच भी रिकॉर्ड 72.5 फीसदी मतदान हुआ. पुलिस ने इस चुनावी हिंसा में 12 लोगों की मौत होने की पुष्टि की है. इनमें से 6 मृतकों की पहचान नहीं की जा सकी है, जबकि 43 अन्य घायल हुए हैं. चुनावी हिंसा पर कोलकाता हाई कोर्ट ने चुनाव आयुक्त और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. केंद्र ने भी राज्य सरकार से जवाब मांगा है.
पश्चिम बंगाल में आज 621 जिला परिषदों, 6,157 पंचायत समितियों और 31,827 ग्राम पंचायतों में चुनाव हुआ. चुनाव के लिए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे, लेकिन जब वोटिंग शुरू हुई तो सारे इंतजाम धरे के धरे रह गए. कई मतदान स्थलों पर लोगों की गुंडागर्दी साफ देखने को मिली. वोटिंग में हिंसा के ऐसे कई वीडियो वायरल हुए हैं जिनमें राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता विरोधी गुटों के साथ मारपीट करते साफ देखे जा सकते हैं. सीपीआईएम और बीजेपी ने इस चुनावी हिंसा के लिए टीएमसी को जिम्मेदार ठहराया है.
वोटिंग के दौरान 12 लोगों की मौत
पंचायत चुनाव में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किये जाने तथा पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्यों से 60000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किये जाने के बावजूद उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, पूर्वी मिदनापुर, बर्दवान, नदिया, मुर्शिदाबाद और दक्षिणी दिनाजपुर जिलों में हिंसक झड़प हुईं. कई मतदान केंद्रों के समीप देशी बम भी फेंके गए. मतदान के दौरान पूरे राज्य में 12 लोगों के मारे जाने के समाचार हैं.
पश्चिम बंगाल के डीजीपी सुरजीत कर पुरकायस्थ ने बताया कि प्रदेशभर में चुनावी हिंसा में 12 लोग मारे गए, जिनमें से 6 की पहचान नहीं हो पाई है. हिंसा में 3 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं. उन्होंने बताया कि पिछले चुनाव में 25 लोग मारे गए थे.
शांतिपुर में एक व्यक्ति की मौत हो गई. 24 परगना कुलतोली में एक टीएमसी कार्यकर्ता और नॉर्थ 24 परगना के अमडंगा में सीपीएम कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई. मुर्शिदाबाद में एक भाजपा कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई. चुनावी हिंसा की चपेट में स्थानीय पत्रकार भी आ गए.
चुनाव के बाद राजनीतिक बयानबाजी
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि पहले तो, लोगों को नामांकन पत्र दाखिल नहीं करने दिया. फिर, नामांकन के बाद उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए धमकी देने लगी. जिन लोगों ने नाम वापस नहीं लिया, उन पर हमला किया गया. यह कुछ नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पूरी तरह नष्ट करना है. हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि पिछले वाम शासन की तुलना में यह कम है.
टीएमसी नेता डेरेक ओब्रायन ने ट्वीट किया, ‘बंगाल के सभी नये-नवेले विशेषज्ञों के लिए राज्य में पंचायत चुनाव का इतिहास है. माकपा शासन में 1990 के दशक में चुनाव हिंसा में 400 की मौत. 2003 में 40 की मौत. हर मौत त्रासदी है. हां, कुछ दर्जन घटनाएं हुई हैं. 58,000 मतदान केंद्रों में 40 प्रतिशत क्या है?’
हिंसा पर केंद्र को नोटिस
पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा के मामले में कोलकाता हाई कोर्ट ने हिंसा के फुटेज देखने के बाद चुनाव आयुक्त और गृह सचिव को समन जारी किया. केंद्र सरकार ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार से रिपोर्ट मांगी है.
नामांकन के दौरान भी हुई थी हिंसा
राज्य में वोटिंग के अलावा नामांकन के दौरान भी कई स्थानों पर जमकर हिंसा हुई. टीएमसी कार्यकर्ताओं और अन्य विपक्षी दलों के बीच हुई हिंसा में कई लोगों की जान गई. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया कि हिंसा में उनकी पार्टी के 14 कार्यकर्ता मारे गए, जबकि बीजेपी ने अपने 52 कार्यकर्ताओं के मारे जाने का दावा किया.
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