इन्दौरके एक संस्कृतके विद्वानसे मैंने निवेदन करते हुए कहा की मुझे संस्कृत व्याकरण सीखना है विशेषकर लघुसिद्धान्तकौमुदी एवं पाणिनीय अष्टाध्यायी ! उन्होंने मुझसे कहा, “आपकी मासिक पत्रिका हमने पढी है, संस्कृत तो आपके गुणसूत्रमें (जींसमें) है इसलिए आप इसे शीघ्र सीख लेंगी ऐसा मेरा विश्वास है ! तब मुझे ध्यानमें आया कि सच हम सनातनी आर्योंके गुणसूत्रमें यह भाषा अंकित है, हमें तो मात्र उसका विस्मरण हुआ है, थोडा प्रयास कर हम उसे अवश्य सीख सकते हैं ! हम सभी हिन्दुओंको इस बातकाका भान दिलाने हेतु उनका हृदयसे आभार !
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