नई दिल्लीः जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालयकी शैक्षणिक परिषदने राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन केंद्र स्थापित करनेके प्रस्तावको स्वीकृति दी, जिसके अंतर्गत इसमें ‘इस्लामिक आतंकवाद’पर पाठ्यक्रम होगा। परिषदकी बैठकमें हिस्सा लेनेकेबाद एक प्राध्यापकने यह सूचना दी। परिषदकी १४५वीं बैठकमें विशेष आमंत्रित सदस्य और जेएनयू शिक्षक संघके पदाधिकारी सुधीर.के.सुथरने बताया कि परिषदके कई सदस्योंने इस्लामिक आतंकवादपर पाठ्यक्रम शुरु करनेके प्रस्तावका यह कहते हुए विरोध किया कि यह सांप्रदायिक स्वभावका पाठ्यक्रम है। बैठकमें हिस्सा लेने वाले परिषदके ही एक अन्य सदस्यने कहा कि कई सदस्योंने इस प्रस्तावका समर्थन किया।
३० अप्रैलके समाचारके अनुसार जेएनयूमें २७ अप्रैलको लव जिहाद ‘इन द नेम ऑफ लव – मेलन्काली ऑफ गॉड्स ओन कंट्री (In the Name of Love-Melancholy of God’s Own Country)’ नामकी चलचित्रके प्रदर्शनका आयोजन ग्लोबल इंडियन फाउंडेशन और जेएनयूके विवेकानंद विचार मंचने किया था। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ और जेंडर सेंसिटाइजेशन कमेटी एगेंस्ट सेक्शुअल हरेसमेंटने चलचित्रको दिखाए जानेके मध्य बाधा डाली और आक्षेप लगाया कि चलचित्रके रूपमें घृणाका प्रचार किया जा रहा है। इस मध्य प्रदर्शनकारियों और एबीवीपीके सदस्योंके बीच झगडा हो गया।
जेएनयूएसयूने एबीवीपीके सदस्योंपर छात्र संघके पूर्व अध्यक्ष मोहित कुमार पांडेपर आक्रमण करनेका आक्षेप लगाते हुए कहा था कि, ‘उन्होंने छात्राओंको अपशब्द कहे और उस वाहनकी खिडकीका कांंच तोड दिया जिसमें जिसमें पांडेने खुदकी रक्षा हेतु शरण ली थी।’
वहीं एबीवीपीके सदस्य सौरभ शर्माने आक्षेप लगाया था कि, ‘पांडेने मुझे मारनेकी धमकी दी और जातिसूचक शब्द कहे। जब एक रक्षक हस्तक्षेप करने आया तो उसने उसपर अपना वाहन चढा दिया।’ एबीवीपीने एक बयानमें कहा, ‘साबरमती ढाबेपर एक चलचित्र दिखानेपर बाधा डालनेकेबाद वाम प्रदर्शनकारियोंने एक रक्षकको जानबूझकर चोटिल कर दिया।’
Leave a Reply