धर्मधारा
एक व्यक्तिने पूछा है मैं प्रतिदिन प्रातःकाल उठनेका प्रयत्न करता हूं; किन्तु आलस्यवश नहीं उठ पाता हूं एवं देरसे उठनेपर मुझे आत्मग्लानि होती है, इस हेतु मैं क्या करूं ?, यह समझमें नहीं आता है ।
इस हेतु आप निम्नलिखित प्रयत्न करें,
सर्वप्रथम इस प्रकार स्वयंसूचनाएं लें –
जब-जब मैं प्रातःकाल छह बजे उठनेका गजर (अलार्म) लगाऊंगा और उसके बजनेपर आलस्यवश उसे बन्दकर सो जाऊंगा, तब-तब मुझे ध्यानमें आएगा कि आलस्य करना, यह मेरा दोष है और प्रातःकाल देरसे उठनेपर मेरी दिनचर्या प्रभावित होती है; अतः मैं अलार्म बजते ही उठ जाऊंगा ।”
यह स्वयंसूचना नेत्र बन्दकर अपने मनको शान्त कर, दिनमें पांच सत्रोंमें पांच बार दोहराएं एवं रात्रिमें ईश्वरको प्रार्थना कर अपने इस दोषको बताएं तथा यह दूर हो, ऐसी प्रार्थना करें तथा अन्तमें जब निद्रा गहरी होने लगे तो इस स्वयंसूचनाको दससे पन्द्रह बार जब तक नींद न आ जाए, उसे दोहराते हुए सो जाएं !
यदि आप रात्रिमें अधिक देरसे सोते हैं तो भी प्रातःकाल निद्रा नहीं खुलती है; अतः शरीरको सातसे आठ घण्टे पर्याप्त विश्राम मिले इस प्रकार नियोजन कर सोएं ! साथ ही यदि वास्तुमें अत्यधिक कष्ट हो तो भी निद्रा समयपर नहीं खुलती है, ऐसेमें वास्तु शुद्धि हेतु सर्व आध्यात्मिक उपाय करें, यह हम धर्मधाराके श्रव्य (ऑडियो) सत्संगमें कई बार बता ही चुके हैं ।
वास्तु शुद्धिके साथ ही और भी कुछ उपाय करें –
१. पूर्ण अन्धेरा कर कक्षमें न सोएं ! एक घीका दिया या तिलके तेलका दिया जलाकर सोएं !
२. रात्रिमें स्वच्छ चादर या यदि सम्भव हो तो श्वेत चादर बिछाकर स्वयं एवं उठनेके पश्चात् उसे त्वरित उठा दें ।
३. सोनेसे पूर्व हाथ-पांव शीतल जलसे धोकर एवं दन्तमंजन कर सोएं !
४. दक्षिण दिशाके ओर पैर कर न सोएं !
५. सोनेसे पूर्व ‘श्रीगुरु देव दत्त’का पन्द्रह मिनिट जप कर सोएं; क्योंकि आज अधिकांश घरोंमें पितृदोष होता है, ऐसेमें घरके अतृप्त पूर्वज रात्रिमें घरके सदस्योंका काला आवरण बढा देते हैं या कक्षमें काली शक्ति भर देते हैं, जिससे व्यक्तिमें आलस्यकी वृद्धि होती है और वह उठ नहीं पाता है । ऐसेमें कक्षसे पितरोंके चित्र दृष्टिके सामनेसे हटा दें एवं पितृदोष निवारणार्थ सर्व प्रयत्न करें, यह भी हम आपको ‘धर्मधारा’के श्रव्य सत्संगमें कई बार बता ही चुके हैं ।
६. सात्त्विक वस्त्र एवं भोजन करें तथा अधिकाधिक नामजप करें !
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