उत्तिष्ठ कौन्तेय


राष्ट्रभक्तिके संस्कारको सुदृढ करने हेतु और इस्लामिक कट्टरता दूर करने हेतु चीन अपना रहा वैचारिक कूटनीति
चीनके एक सरकारी इस्लामी संगठनने कहा है कि ‘राष्ट्रके सिद्धान्त’को और अच्छेसे समझने और ‘देशभक्ति’की भावना’को आगे बढानेके लिए उन्हें चीनका संविधान और समाजवादके मूल विचारोंका अध्ययन करना चाहिए। साथ ही इस संगठनने कहा है कि ‘राष्ट्रके सिद्धान्त’को और सुस्पष्टतासे समझने और ‘देशभक्तिकी भावना’को आगे बढानेके लिए उन्हें चीनका संविधान और समाजवादके मूल विचारोंका अध्ययन करना चाहिए।  चीनके विशेषज्ञोंने चाइना इस्लामिक एसोसिएशनकी इस पहलकी स्तुति की है।
चीनी शासनने मुसलमानोंका ‘ब्रेनवॉश’ करनेके लिए निकाली हैं ये युक्तियां
इस्लामी चरमपन्थसे लडनेके लिए चीनी शासन, कोई सैन्य अभियान नहीं चला रहा; अपितु इसके लिए इस्लामी बन्दियोंका वैचारिक परिवर्तन कर रहा है। चीनके शिविरोंमें रहे उमर बेकाली और अन्य बन्दियोंको अपनी इस्लामी मान्यताओंको छोडना पडा, स्वयंकी और अपने प्रियजनोंकी आलोचना करनी पडी और सत्तारूढ कम्युनिस्ट पार्टीकी प्रशंसा करनी पडी ! इन सबके लिए बन्दियोंको घण्टोंतक मानसिक यन्त्रणा दी गई ! एक कजाख मुस्लिम बेकालीने आदेशोंको माननेसे अस्वीकार किया तो उन्हें पांच घण्टोंतक एक भीतपर खडे होनेके लिए विवश किया गया !
 क्या भारत चीनसे कुछ सीखेगा ? यहां तो धर्मान्धों और आतंकवादियोंको भिन्न प्रकारकी सुविधाएं देकर अपनी रोटियां सेंकी जाती है, राष्ट्र और राष्ट्ररक्षणकी चिन्ता किसे है ?
यदि चीन समान वैचारिक कट्टरताको दूर करने हेतु कुछ प्रयास किया जाता तो आज कश्मीरकी जनता सैनिकोंपर पथराव नहीं करती और न ही आतंकवादियोंको अपना संरक्षण देती ! (२१.५.२०१८)


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