निपाह विषाणुसे अब तक ९ लोगोंकी मृत्यु हो चुकी है। राज्य सरकारने इसे सबसे तेजीसे फैलने वाला विषाणु कहा है। सरकारने इस विषाणुसे लडनेकेलिए २० लाख रुपयेकी आपातकालीन निधि भी कोझिकोड चिकित्सिय शैक्षणिक संस्थानको दिया है ताकि इस ज्वरसे बचा जा सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठनके अनुसार इस विषाणुके लिए किसी प्रकारका कोई टीकाकरण उपलब्ध नहीं है जो मानव और जानवरोंको दिया जा सके। NiV से ग्रसित रोगीका केवल ध्यान दिया जा सकती है। श्री गंगा राम अस्पतालके मेडिसिन डिपार्टमेंटके वरिष्ठ कंसल्टेंट अतुल गोगियाके अनुसार यह इस विषाणुका संक्रमण दूसरे विषाणुजनित संक्रमणकी तरह है। यह श्वास और केन्द्रीय तन्त्रिका तन्त्रको प्रभावित करता है।
भारतमें ये विषाणु २००१ में पश्चिमी बंगालके सिलिगुडीमें मिला था।
इसके बाद २००७ में पश्चिमी बंगालमें यह पहचाना गया। वैज्ञानिकोंने पाया कि लोगोंमें ये विषाणु कच्चे पाम वृक्षसे तोडकर पीनेसे ये रोग फैल रहा है।
तीन तरहसे फैलता है ये विषाणु
ऐसे इंसानों तक पहुंच रहा है ये विषाणु
निपाह विषाणुसे संक्रमित चमगादड या कोई और पक्षी किसी फलपर चोंच मारता है या खाता है, तो ये विषाणु फलमें आ जाता है। ये फल कोई भी हो सकता है।
यदि किसी सूअरमें यह विषाणु है तो उसके माध्यमसे भी इसका संक्रमण आप तक पहुंच सकता है।
इसके अतिरिक्त अगर कोई व्यक्ति इस विषाणुसे संक्रमित है और आप उसके संपर्कमें आते हैं तो आप इसके पाशमें हो जाएंगे।
कुछ सावधानियोंसे ही इससे संक्रमित होने बचा जा सकता है
1. सुनिश्चित करें कि आप जो खाना खा रहे हैं वह किसी चमगादड या उसके मल से खराब तो नहीं हुआ है। चमगादड के खाए हुए फल न खाएं।
2. पामके वृक्षके पास खुले बर्तनमें बनी टोडी शराब पीनेसे बचें।
3. रोग से ग्रसित किसी भी व्यक्तिसे संपर्क न करें।
4. शौचालयमें प्रयोग होने वाली चीजें, जैसे बाल्टी और मगको साफ रखें।
5. इंफोक्लीनिकके अनुसार निपाह ज्वरसे मरने वाले किसी भी व्यक्तिके मृत शरीरको ले जाते समय चेहरेको ढंकना आवश्यक है। मृत व्यक्तिको गले लगानेसे बचें। इसके साथ ही शरीरको नहाते समय विशेष सावधानियां रखनेकी बात कही गई है।
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