नौ-सेनाध्यक्ष सुनील लांबाने कहा है कि मालदीवका अधिक झुकाव चीनकी ओर है। वह भारतको महत्व नहीं दे रहा है। नई दिल्ली और मालेके बीच के संबंध अभी सामान्य नहीं हुए हैं।
लांबाने कहा कि मालदीवके एक्सक्लूसिव इकॉनामिक जोनकी (ईईजेड) देखरेख भारतकी नौसेनाने फिर आरम्भ कर दी है, परन्तु मालदीव एक चुनौतीके साथ समस्या बना हुआ है। वहांकी सरकारने संविधानमें परिवर्तन करके कई द्वीप चीनको दे दिए हैं।
मालदीवसे भारतके संबंध उस समय सख्त हुए थे, जब अब्दुल्ला यमीनकी सरकारके आपातकाल कालके फैसलेका भारतने विरोध किया था। वहांके विपक्षी दलोंकी याचनापर भारत ने सैन्य हस्तक्षेप करने से मना कर दिया था।
लांबाने कहा कि मालदीवने न तो मिलन युद्धाभ्यासमें हिस्सा लिया और न ही डिफेंस एक्सपो 2018 में अपना प्रतिनिधि भेजा। इससे साफ है कि वह भारतको गंभीरताटसे नहीं ले रहा है।
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