रामपुर : उत्तरप्रदेशमें पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान योगी सरकारद्वारा मदरसोंमें एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लगानेके निर्णयपर भडक गए हैं। शुक्रवारको रामपुरमें उन्होंने प्रदेशकी योगी सरकारपर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह एक हठधर्मीका निर्णय है। आजम खानने कहा कि ऐसा करना पूरे मदरसा प्रणालीमें हस्तक्षेप करने जैसा होगा। शुक्रवारको रामपुरमें आजम खानने कहा कि प्रदेश सरकारको मदरसोंमें एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू नहीं करना चाहिए। उन्होंने इसे सरकारके द्वारा दी जा रही दंड बताया।
आजम खानने कहा कि सरकार कुछ मौलवियोंको वेतन देती है। कुछ मदरसोंको सरकारकी ओरसे सहायता भी मिलती है। उन्होंने कहा वो लोग सहायता देते हैं तो यह सहायताका दंड है। सरकार सहायतापर ध्यान करे कि यह सहायता देना सही है या गलत। लेकिन मदरसोंकी स्वायत्तता, आजादीपर किसी तरहका कोई कुठाराघात नहीं करना चाहिए। आजम खानने उत्तरप्रदेशकी योगी सरकारद्वारा इलाहाबादका नाम बदलकर प्रयागराज करनेकी संभावनाओंपर भी सरकारको घेरा । उन्होंने कहा कि वास्तवमें इलाहाबादका नाम अलाहाबाद है। अल्लाहका नाम बदलकर भी क्या रखेंगे। उस उच्चतम शक्तिको सब मानते हैं। योगी जीको अल्लाहसे इतना रोष नहीं होना चाहिए।
उत्तरप्रदेशके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथकी अध्यक्षतामें २२ मईको मन्त्रीमण्डलकी बैठकमें मदरसोंमें शिक्षाका स्तर सुधारनेके लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया । अब प्रदेशके मदरसोंमें दीनियत के अतिरिक्त पाठ्यक्रममें एनसीईआरटीकी किताबें सम्मिलित होंगी। मदरसोंमें हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, कंप्यूटर और सामाजिक विज्ञानके पाठ्यक्रमके लिए ये आवश्यक था कि हिंदी और अंग्रेजी भाषामें इनकी किताबें उपलब्ध कराई जाएं। जानकारीके अनुसार, ये संशोधन प्रस्ताव राज्य मदरसा बोर्डने दिया था।
इस बैठकमें उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी-फारसी मदरसा मान्यता प्रशासन और सेवा नियमावली २०१६ में संशोधन प्रस्तावको स्वीकृति दे दी गई है। यह संशोधन प्रस्ताव राज्य मदरसा मंडलने दिया था । मंडलने पारंपरिक शिक्षा पद्धतिको बदलते हुए मदरसोंको आधुनिक बनाने की दिशामें प्रयास किया है। अब मदरसोंके छात्र उर्दूके साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी माध्यमसे भी पढाई कर सकेंगे। प्रदेश सरकारके प्रवक्ता व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्माने मंत्रीमंडलके निर्णयकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मदरसोंमें धर्मशिक्षाके अतिरिक्त गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, संगणकीय व सामाजिक विज्ञान जैसे विषयोंकी पढाई नहीं होती है। सरकारके इस निर्णयके बाद उर्दूके साथ हिंदी और अंग्रेजी माध्यममें सभी विषयोंकी पढाई होगी ।
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